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Ye Kauve Kale-Kale!
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- Stock: In Stock
- Brand: Jugnoo Prakashan, an imprint of Ektara Trust
- Model: Poem
- Weight: 80.00g
- EAN: 4901
- ISBN: 978-81-9622-585-8
गुलज़ार की यह नज्म कहती है कि कौए पहले कई रंगों के होते थे। अब तो सिर्फ काले कौए दिखते हैं। यह कैसे हुआ कि सब काले हो गएॽ काले रंग की किस खूबी ने कौओं का मन जीता कि वो काले हो गएॽ
इस किताब के लिए एलन शॉ ने कौओं की कई मुद्राएँ बनाई है। उन्होंने कौओं का आकार ही नहीं उनका चलना, बैठना, बोलना, सुनना भी बनाया है।
| Age | |
| Age | 6+ |
| Book Details | |
| Author | Gulzar |
| Illustrator | Allen Shaw |
| Publisher | Jugnoo Prakashan, an imprint of Ektara Trust |
| Year | 2024 |
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-81-9622-585-8 |
| Language | Hindi |
| No. of Pages | 20 |
| Size | 8.5×8.5 inches |
| Colour | 4 colour print |
