- Stock: In Stock
- Brand: Jugnoo Prakashan, an imprint of Ektara Trust
- Model: Illustrated Poem
- EAN: 4901
- ISBN: 978-819706-38-7-
कथाकार-फिल्मकार समीना मिश्रा की एक और शानदार किताब है - लकीरें।
लकीरें...
वे एक तरह का निशान होती हैं | जहाँ
सिर्फ जगह ही जगह हो, वहाँ
कितना भी चलने से 'यहाँ'
और 'वहाँ' नहीं
बनता | लेकिन
एक महीन-सी लकीर उकेर देने से यहाँ और वहाँ बन उठते हैं | और निशान सिर्फ जगह का नहीं होकर हमारे भीतर बनने, बढ़ने लगता है | और कभी-कभी बस वही उठकर दिखता है | हर जगह, हर
बात पर |
यह कविता ऐसी ही एक लकीर से जूझती एक
आवाज़ से बनी है | लकीर
जो इस बात से थोड़ी और खिंच जाती है कि वो एक लड़की है, जिसके घर का पता एक परेशां वतन है, जो अब एक अलग वतन में घर-परिवार-स्कूल की परेशानियों को जानती
है, समझती
है | लेकिन
उम्मीद का सिरा थामे रहना चाहती है | कृपा के बनाए चित्र उस लकीर के हर रंग, हर पते और हर यहाँ और वहाँ को बेहद संवेदनशील लहज़े से थामे
चलते हैं।
उनके चित्र इस किताब को और गहराते हैं। वे टैक्स्ट के समानान्तर कहन की एक गली भी बनाते हैं जहाँ सिर्फ चित्र ही जा सकते थे। इस तरह से चित्रों को उनकी आवाज़ देती हैं।
| Age | |
| Age | 6+ |
| Book Details | |
| Author | Samina Mishra |
| Illustrator | Kripa |
| Publisher | Jugnoo Prakashan, an imprint of Ektara Trust |
| Year | 2025 |
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-819706-38-7-9 |
| Language | Bi-lingual- Hindi & English |
| No. of Pages | 44 |
| Size | 10.0×10.0 inches |
| Colour | 4 colour print |
