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Chatur Chitrakar
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- Stock: In Stock
- Brand: Jugnoo Prakashan, an imprint of Ektara Trust
- Model: Poem Collection
- EAN: 4901
- ISBN: 978-93-4928-635-1
इस कविता में एक कहानी चलती है। एक खेल भी चलता है। चित्रकार चित्र बना रहा था और सामने शेर आकर बैठ गया। चित्रकार डरा पर चित्र बनाता रहा। जब उसने शेर को घूम कर बैठने को कहा तो शेर पीठ कर बैठ गया। उसके बैठते ही चित्रकार रफुचक्कर हो गया। जाते-जाते शेर के लिए अपने कागज़ और रंग भी छोड़ गया कि वो खुद चित्र बनाने की प्रैक्टिस करता रहे।
इस कविता का खेल किरदारों के हावभाव में देखा जा सकता है। चन्द्रमोहन कुलकर्णी ने उसे किस खूबसूरती से दिखाया है। चित्रकार का डरा होना खेल में डरे होने जैसा है। और शेर की खीज भी।
| Age | |
| Age | 3+ |
| Book Details | |
| Author | Ramnaresh Tripathi |
| Illustrator | Chandra Mohan Kulkarni |
| Publisher | Jugnoo Prakashan, an imprint of Ektara Trust |
| Year | 2026 |
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-93-4928-635-1 |
| Language | Hindi |
| No. of Pages | 32 |
| Size | 8.5×8.5 inches |
| Colour | 4 colour print |
