- Stock: In Stock
- Brand: Jugnoo Prakashan, an imprint of Ektara Trust
- Model: Picture Book
- Weight: 50.00g
- EAN: 4901
- ISBN: 978-93-4928-686-3
कितने ही रोज़गार हैं जो कम दिखते-दिखते नहीं दिखने लगते हैं। उनका कम दिखना नहीं दिखने को नॉर्मलाइज़ करने की तरह होता है। इस रस्ते की ढलान उस काम के खात्मे की ओर जाती है। वहाँ नाउम्मीदी है। पर यहीं पर अगर आप चढ़ाई पर चढ़ने का कठिन रास्ते ले लें तो बाद पलट भी सकती है। गुनगुन ऑर्केस्ट्रा में यही नाउम्मीदी-उम्मीदी है। एक भी शब्द खर्च किए बगैर गुनगुन ऑर्केस्ट्रा शादियों में बैंड-बाजा बजाने वाली की कहानी दिखाती है। वो भी असम के एक गाँव में रहने वाले आखिरी ऑर्केस्ट्रा की। आज की शादी में आखिरी बार सब मिलकर बजाएँगे। दादा को उठते, चाय बनाते-पीते, तैयार होते, पेटी से ट्रम्पेट निकालते देख उसकी पोती भी साथ हो लेती है। दादा-पोती असम की हरियाली से होते हुए साइकिल से चलते जाते हैं। रास्ते में असम की हवा है, पेड़, गाने, लोग, खेत, रातें हैं। कितनी कम किताबों में यह इलाका अपने पूरे ताब के साथ नज़र आता है। वहाँ के रिवाज़, खानपान, पोषाकें सब। शादी में जीभर बजाने के पास वो लौटते हैं। पर शायद यह आखिरी बार न हो - किताब का आखिरी पन्ना पाठक इस इशारे के साथ पलटता है।
पंकज सैकिया असम के हैं और हर जगह असम अपने साथ लेकर चलते हैं। और अच्छा ही है कि साथ लेकर चलते हैं।
| Age | |
| Age | 6+ |
| Book Details | |
| Author | Pankaj Saikia |
| Illustrator | Pankaj Saikia |
| Publisher | Jugnoo Prakashan, an imprint of Ektara Trust |
| Year | 2026 |
| Binding | Paperback |
| ISBN | 978-93-4928-686-3 |
| Language | Hindi |
| No. of Pages | 32 |
| Size | 7.5×7.5 inches |
| Colour | Color |
