New
Mendhak Bola
from
₹90.00
Ex Tax: ₹90.00
- Stock: In Stock
- Brand: Jugnoo Prakashan, an imprint of Ektara Trust
- Model: Story Book
- Weight: 80.00g
- EAN: 4901
- ISBN: 978-81-9706-388-6
- MPN: 978-81-9706-388-6
मेंढक बोला अभी अभी पढ़ना सीख रहे या पढ़ना सीखने जाने वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी किताब हो सकती है।
इसमें हर बार टीचर एक सवाल पूछते हैं और मेंढक हर बार उनका जवाब देता है।
मसलन,
टीचर बोले नाम बताओ
मेंढक बोला टर टर टर
दो तीन पंक्तियों में ही बच्चे को इस कविता का स्ट्रक्चर समझ में आ जाता है।
आप उनसे सवाल पूछेंगे और वे उत्तर दे देंगे। एक बहुत सरल सी दिखने वाली कविता है यह।
बच्चों का भाषा की तरफ आने के लिए ज़रूरी सेंस ऑफ एचीवमेंट महसूस करने वाली। ये वे कविताएँ हैं जो
बच्चे अनेकानेक बार पढ़ना चाहते हैं। बार बार पढ़ने का सुख उठाने के लिए।
इसके चित्र भी इस कविता को समझने और इस कविता का परिवेश समझने में मददगार साबित होते हैं।
इस कविता की पृष्ठभूमि भी बताते हैं। और इस कविता का अन्त भी बताते हैं। एक मायने में वे इस पूरी कविता
में शरारत भर देते हैं।
तो कविता का एक स्तर तो यह है। एक इस कविता का भीतरी संसार है। जो पाठक को फिलहाल न खुले मगर उसके जेहन में
कहीं न कहीं इसकी छाया बनी रहेगी। वह यह कि टीचर इस कविता में मेंढक को समझ नहीं पा रहे हैं। मेंढक हर बार जवाब दे रहा है।
उसकी अपनी टर टर भाषा में। वह जो कहेगा टर टर ही करेगा। शिक्षक इस बात से बेखबर हैं। यह स्कूलों में आम है। कुछ बच्चे हमेशा शिक्षक से
यह उन्हें समझने की ख्वाहिश लिए ही स्कूल से विदा हो जाते हैं।
मेंढक इन सब बच्चों का प्रतिनिधि बनकर इस कविता में आता है।
राजीव आइप के चित्र इस कविता को विस्तार देते हैं। गवाही देते हैं। इस कविता की कचोट को कुछ हलका करते हैं।
इस कविता को क्लासरूम में या घर पर कई कई पंक्तियों को जोड़कर विस्तारित किया जा सकता है। मेंढक की जगह
घोड़ा बोला हिन हिन हिन भी किया जा सकता है।
| Age | |
| Age | 3+ |
| Book Details | |
| Author | Rakesh Ranjan |
| Illustrator | Rajiv Eipe |
| Publisher | Jugnoo Prakashan, an imprint of Ektara Trust |
| Year | 2025 |
| Binding | Paperback |
| ISBN | 9788197063886 |
| Language | Hindi |
| No. of Pages | 24 |
| Size | 8.5×8.5 inches |
| Colour | Four Colour Print |
